भूमिका, कार्य और जिम्मेदारियां

निदेशक कोषागार द्वारा निम्नलिखित कार्य सम्पादित किये जाते हैं :-

  • प्रदेश के वित्त एवं लेखा सेवा के विभिन्न अधिकारियों को विभिन्न विभागों, कारपोरेशन्स तथा अण्डर टेकिंग में उनकी उपयोगिता तथा वित्तीय नियमों में समय-समय पर शासन को सुधार का सुझाव देना ।
  • मण्डलीय अपर निदेशक, कोषागार एवं पेंशन/कोषागारों तथा अपर निदेशक, शिविर कार्यालय इलाहाबाद के बजट नियंत्रक अधिकारी के रूप में कार्य करना ।
  • कर्मचारियों का स्थानान्तरण, प्रतिनियुक्ति तथा उन्हें स्वीकृत होने वाले भवन निर्माण अग्रिम भवन मरम्मत अग्रिम, वाहन अग्रिम, 60 दिनों का अर्जित अवकाश एवं वित्त एवं लेखा सेवा के ग्रुप-बी अधिकारियों की 03 महीने तक की चिकित्सा अवकाश स्वीकृत करना ।
  • वित्त एवं लेखा सेवा, सहायक लेखाधिकारी, सहायक कोषाधिकारी, निदेशालय एवं अपर निदेशक मण्डल/शिविर कार्यालय के कर्मचारियों का रू0 1,00,000.00 तक चिकित्सा प्रतिपूर्ति स्वीकृत करना तथा वित्त एवं लेखा सेवा के सभी अधिकारियों का अवकाश नकदीकरण स्वीकृत करना तथा उपरोक्त अधिकारियों/कर्मचारियों का सेवानिवृत्ति के बाद बीमा दावा एवं पेंशन प्रकरण को अग्रसारित करना ।
  • वित्त एवं लेखा सेवा, सहायक लेखाधिकारी, सहायक कोषाधिकारी तथा कोषागार के कर्मचारियों के प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम तथा प्रषिक्षण की व्यवस्था करना ।
  • वित्त एवं लेखा सेवा के समूह ’क’ के अधिकारियों की चरित्र पंजिका का रख-रखाव करना तथा उपरोक्त अधिकारियों की चरित्र पंजिका को पूरे करने हेतु नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करना ।
  • वित्त एवं लेखा सेवा के समस्त अधिकारियों के जी0पी0एफ0 अग्रिम, 90 प्रतिशत जी0पी0एफ0 के अन्तिम निष्कासन, डिपाजिट लिंक इन्सोरेन्स स्कीम के अन्तर्गत भुगतान (परन्तु अन्य विभागों के निदेशकों के दावों को छोड़कर) स्वीकृत करना।
  • निदेशक कोषागार को निदेशक पेंशन, निदेशक विभागीय लेखा, निदेशक वित्तीय प्रबन्ध प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान, निदेशक पंचायती राज (लेखा) के जी0पी0एफ0 के अन्तिम निष्कासन को चेक करने का अधिकार है ।
  • वित्त एवं लेखा सेवा के अधिकारियों द्वारा लोक सेवा आयोग तथा संघ लोक सेवा आयोग में परीक्षा या साक्षात्कार देने हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र देना ।
  • मण्डलीय अपर निदेशक के कार्यालयों, सहायक लेखाधिकारी, सहायक कोषाधिकारियों एवं कोषागारों/उपकोषागारों के कार्यों की समीक्षा करना ।
  • निदेशक कोषागार को महालेखाकार कार्यालय-इलाहाबाद तथा कोषागारों के मध्य सामन्जस्य स्थापित करना पड़ता है ।
  • कोषागार निदेशालय में कार्य के बढ़ने एवं उचित नियंत्रण हेतु कोषागार निदेशालय के अतिरिक्त मण्डलीय अपर निदेशक, कोषागार एवं पेंशन की स्थापना की गयी है ।
  • मण्डलीय अपर निदेशक द्वारा वर्ष में दो बार कोषागारों का निरीक्षण किया जाता है तथा यह भी सुनिष्चित किया जाता है कि कोषाधिकारी द्वारा नियमानुसार जो निरीक्षण किये जाने हैं वे अवश्य किये जाये ।
  • कोषागारों में चल रहे कम्प्यूटराइजेशन को गति प्रदान करने हेतु मण्डलीय अपर निदेशकों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण करना तथा यदि उसमें कोई कमी पायी जाती है तो उससे निदेशालय को अवगत कराना ।
  • वित्तीय सांख्यकी निदेशालय को इनपुट तथा महालेखाकार भेजे जाने वाले लेखे को समय से भेजने हेतु कोषागारों से समन्वय स्थापित किया जाता है ।
  • अपर निदेशक कोषागार एवं पेंशन द्वारा कोषागार के कैश शाखा के कर्मचारियों का नियमानुसार स्थानान्तरण, वरिष्ठता सूची एवं मुख्य रोकड़िया की नियुक्ति व तैनाती के संबंध में मण्डलायुक्त से संस्तुति लेकर तैनाती की जाती है ।
  • सहायक लेखाधिकारी, उपकोषाधिकारी के अर्जित अवकाश, नकदीकरण, चिकित्सा अवकाश एवं जी0पी0एफ0 के अस्थाई अग्रिम को स्वीकृत करना ।
  • अपर निदेशक द्वारा अपने मण्डल से संबंधित विभागों में लम्बित आडिट पैरा के शीघ्र निस्तारण की कार्यवाही करना तथा विभिन्न सरकारी विभागों में वेतन निर्धारण, आन्तरिक आडिट और वित्त एवं लेखा संबंधी मामलों का पर्यवेक्षण करना।
  • भारत सरकार के द्वारा प्रस्तुत प्रतिपूर्ति दावों संबंधी वाउचरों को समयान्तर्गत प्रस्तुत करना एवं उसकी सही प्रकार से प्रविष्टि कर भुगतान की कार्यवाही सुनिष्चित करना।
  • विभागों को जारी सी0सी0एल0/डी0सी0एल0 का कड़ाई से पालन करवाना ।
  • कोषागारों द्वारा स्टाम्प की उपलब्धता के लिये समय से इडेन्ट भेजने तथा कोषागार एवं उपकोषागार में समुचित मात्रा में स्टाम्प की उपलब्धता को सुनिष्चित करना ।
  • षिकायतों के त्वरित गति से निस्तारण तथा कपटपूर्ण भुगतानों पर आवश्यक कार्यवाही को सुनिष्चित कराना ।
  • 01 अप्रैल, 2000 से गु्रप-बी एवं ग्रुप-सी के कर्मचारियों के सेवानिवृत्त के उपरान्त पेंशन आदि का निर्धारण अपर निदेशक द्वारा किया जाता है ।
  • अपर निदेशक द्वारा अपने जनपद के कोषाधिकारियों की वार्षिक चरित्र पंजिका में समीक्षक अधिकारी के रूप में कार्य करना ।
  • मण्डल के सभी जनपदों में मुख्य कोषाधिकारी तथा अन्य जनपदों में वरिष्ठ कोषाधिकारी का पद सृजित हैं । मुख्य/वरिष्ठ कोषाधिकारी को अपने कोषागारों/उपकोषागार तथा मण्डलीय अपर निदेशक कार्यालयों का आहरण वितरण अधिकारी घोषित किया गया है । कोषागार में सभी प्रकार के स्टाम्प, बहुमूल्य वस्तुयें, ओ0पी0एम0 डबल लाॅक में रखे जाते हैं।
  • बजट नियंत्रण का उत्तरदायित्व शासनादेश दिनांक 6 जून, 1994 द्वारा कोषाधिकारी का कर दिया गया है तथा बीमा के दावों का भुगतान भी कोषागारों से चेक प्राप्त कर किया जा रहा है । कोषाधिकारी को प्रत्येक भुगतान हेतु राज्य सरकार तथा महालेखाकार के प्रति उत्तरदायी बनाया गया है । कोषागार पर प्रशासनिक नियंत्रण संबंधित जिले के जिलाधिकारी का होता है।
  • कोषागार के मुख्यः दो भाग होते हैं: 1. कैश अनुभाग 2. लेखा अनुभाग मुख्य रोकड़िया को कैश अनुभाग का तथा सहा0 कोषाधिकारी को लेखा अनुभाग का प्रभारी बनाया गया है । डबल लाॅक की एक चाभी मुख्य रोकड़िया के पास तथा दूसरी चाभी मुख्य/वरिष्ठ कोषाधिकारी के पास रहती है। मुख्य रोकड़िया को एक ताॅलक का भी प्रभारी बनाया गया है । लेखा अनुभाग द्वारा आय-व्यय, पी0एल0ए0, सी0सी0एल0, पेंशन आदि के समस्त लेखे तैयार कर महालेखाकार एवं वित्तीय सांख्यकी निदेशालय को भेजे जाते हैं ।
  • प्रत्येक विभाग में लेखा अनुभाग का गठन किया है जिसका प्रभारी उस विभाग में नियुक्त वरिष्ठतम वित्त एवं लेखा सेवा का अधिकारी होता है । यह लेखा अनुभाग उस विभाग के विभागाध्यक्ष को वित्तीय मामलों में सहयोग प्रदान करता है । बजट नियंत्रण तथा लेखों से संबंधित रिकार्ड का समुचित रख-रखाव व वित्तीय हस्त-पुस्तिका में इंगित नियमों के अन्तर्गत विभाग में वित्तीय अनुशासन पालन उस विभाग में नियुक्त वित्त नियंत्रक द्वारा कराया जाता है ।
  • आन्तरिक सम्परीक्षा, बजट स्टीमेट का परीक्षण करना तथा उसे शासन भेजना तथा विभाग में की जाने वाली सामग्री क्रय को वित्तीय नियमानुसार पालन सुनिष्चित कराना भी वित्त नियंत्रक का दायित्व है ।
  • रेमीटेन्स विभागों में सी0सी0एल0 जारी करना । प्रत्येक विभाग में प्री-आडिट का कार्य करना तथा महालेखाकार कार्यालयों से विभाग के लेखों का मिलान आदि का कार्य लेखा-अनुभाग द्वारा किया जाता है । महालेखाकार द्वारा इंगित आडिट पैरा का उत्तर देना तथा वित्त विभाग को विभाग में किये गये कार्य की त्रैमासिक रिपोर्ट प्रेषित करना। त्रैमासिक रिपोर्ट में विभाग के अन्दर गम्भीर प्रकृति की वित्तीय अनियमितता तथा ऐसे प्रकरणों को भी इंगित करना जिसमें वित्त नियंत्रक की राय विभागाध्यक्ष से अलग रही हो।

बिल पारण

जिला कोषागारों में प्राप्त होने वाले विभिन्न विभागों के बिल अनुदानवार बिल पासिंग लेखाकारों को दे दिये जाते हैं, जो कि उस बिल को पास करने व चेक काटने के लिये उत्तरदायी होते हैं । कोषागार में बिल निर्धारित समय पूर्वाहन 11 बजे से अपराहन 2.30 बजे तक प्राप्त किये जाते हैं जिसका निर्धारण जिलाधिकारी/कोषाधिकारी द्वारा किया जाता है। आहरण वितरण अधिकारी द्वारा अपने बनाये हुये बिलों को कोषागार प्राप्ति रजिस्टर में अंकित कर कोषागार में प्रस्तुत किये जाते हैं । बिल को प्राप्त करने के उपरांत प्रारम्भिक अवस्था में ही निरीक्षण करके त्रुटियों के निराकरण हेतु विभाग को वापस कर दिया जाता है ताकि उस पर होने वाले अनावष्यक समय से बचा जा सके । इसके बाद कोषागार में प्राप्त बिलों का बजट साहित्य के अनुसार कम्प्यूटर द्वारा बिल की अनुदान संख्या, लेखाशीर्षक, मतदेय/भारित, आयोजनागत/आयोजनेत्तर, आवंटित धनराशि आदि का परीक्षण किया जाता है और सही बिल होने पर उस पर भुगतानादेश लिख दिया जाता है । कोषागार में प्राप्त होने वाले सभी बिलों के चेक यदि बिल में कोई आपत्ति नहीं हो तो बिल प्राप्ति की तिथि से तीन दिन के अन्दर जारी कर विभाग को दे दिये जाते हैं।

कम्प्यूटरीकरण

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद विकास संबंधी नयी-नयी योजनाओं के लागू किये जाने के फलस्वरूप राज्य के कार्यो में निरंतर वृद्धि होती रही है, फलस्वरूप इन योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिये आय-व्ययक का आकार एवं प्रशासनिक ढांचा भी तद्नुरूप बढ़ता गया जिसके कारण कोषागारों के कार्य भार में भी अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हुयी । यह वृद्धि कोषागारों के उपरोक्त शीर्षको से संबंधित सभी कार्यो में हुई । यद्यपि इस बढ़े हुये कार्य और दायित्व का निर्वहन कोषागारों में उपलब्ध जनशक्ति के द्वारा समय से किये जाने का प्रयास किया जा रहा था फिर भी कोषागारों के कर्मचारी बिल पारण, चेक, पेंशन भुगतान के अत्यधिक कार्य होने के कारण लेखा संकलित कर निर्धारित अवधि के अन्तर्गत महालेखाकार को सम्प्रेषित किये जाने का कार्य, उनके द्वारा देर रात तक रूक कर किये जाने के बावजूद भी, समय से नही हो पाता था । आंकड़ों की अधिकता और नियमित समय के भीतर लेखा तैयार करने की बाध्यता के कारण लेखा संकलन में मानवीय त्रृटियां स्वाभाविक थी । इसके अतिरिक्त कोषागारों में तैयार होने वाले लेखों में कार्बन का प्रयोग भी किया जाता था । जिसमें प्रायः कार्बन प्रति अस्पष्ट रहती थी। कोषागारों के बढ़ते कार्य एवं उत्तरदायित्व तथा उनसे उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों और त्रुटियों के निराकरण तथा समय से त्रुटि रहित लेखा महालेखाकार को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 1986 में शासन द्वारा कोषागारों के कार्यो को कम्प्यूटरीकरण करने का निर्णय लिया गया । प्रायोगिक रूप से यह कार्य प्रारम्भ में लखनऊ स्थित जवाहर भवन लखनऊ, उन्नाव तथा कोषागार इलाहाबाद में लागू करने का निर्णय लिया गया । उसी समय यह भी निर्णय लिया गया कि कोषागारों में विभिन्न प्रकार के देयकों हेतु प्रयोग में लाये जाने वाले 36 प्रपत्रों को सरलीकृत कर ऐसा स्वरूप प्रदान किया जाय कि वे कम्प्यूटरीकरण व्यवस्था में भी प्रयोग हो सके । अतः इन प्रपत्रों को आवश्यकतानुसार संशाधित कर दिया गया और इसकी संख्या भी घटाकर 6 कर दी गयी। वर्तमान समय में कोषागारों में अपडेटेड रैक सर्वर की स्थापना की जा रही है । इस सर्वर पर लाइनेक्स 7.1 वर्जन, ओ0एस0 तथा डेटा के संकलन हेतु ओरेकल प्लेटफार्म का प्रयोग किया जायेगा। वित्तीय सांख्यकी निदेशालय में एक सेन्ट्रल सर्वर की स्थापना की गयी है । इस सर्वर को डिजास्टर रिकवरी केन्द्र के रूप में प्रयोग किया जायेगा।

पेंशन वितरण

पूरे प्रदेश में पेंशन वितरण का कार्य चेक प्रणाली (जवाहर भवन पद्धति) से किया जा रहा है, जिसके अन्तर्गत कोषागारों द्वारा पेंशनर्स की पेंशन सीधे उनके बैंक खातों में जमा की जाती है। इस व्यवस्था में प्रत्येक माह पेंशन पेंशनर्स के खाते में चली जाती है इस लिये किसी भी पेंशनर को कोषागार आने की अनिवार्यता समाप्त हो गयी है। पेंशनर को केवल वर्ष में एक बार माह नवम्बर/दिसम्बर में जीवित प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने हेतु कोषागार आना पड़ता है । कोषाधिकारी द्वारा पेंशनरों की सुविधा हेतु कोर बैंकिंग के माध्यम से पेंशन भेजने की व्यवस्था की गयी है। इस व्यवस्था से पेंशनर को पूर्व व्यवस्था से जल्दी पेंशन प्राप्त हो सकेगी । कोषाधिकारी द्वारा पेंशनर को भुगतान की जाने वाली पेंशन का समस्त विवरण कोशवानी वेबसाइट पर भी डाला जाता है । अतः सीधे वेबसाइट से भी पेंशनर अपने पेंशन के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं । आयकर के विवरण हेतु पूरे वर्ष में पेंशन के रूप में पेंशनर द्वारा आहरित धनराषि का सम्पूर्ण विवरण कोषाधिकारी द्वारा भी उपलब्ध कराया जाता है ।

प्रभाग का कार्य, निर्णय की प्रक्रिया तथा परीक्षण के विभिन्न स्तर का निर्धारण

निदेशालय द्वारा समस्त कोषागारों में किये जा रहे कार्यों की प्रशासनिक समीक्षा की जाती है, निदेशालय के अधिकारियों तथा मण्डल के अपर निदेशकों द्वारा समय-समय पर कोषागारों का निरीक्षण किया जाता है । निदेशालय स्तर पर प्रत्येक माह में मण्डलीय अपर निदेशकों के परिवेक्षणीय कार्यों की समीक्षा की जाती है ।

प्रभाग का कार्य, निर्णय की प्रक्रिया तथा परीक्षण के विभिन्न स्तर का निर्धारण

निदेशालय द्वारा समस्त कोषागारों में किये जा रहे कार्यों जैसे व्यय, आय, पी0एल0ए0, सी0सी0एल0, पेंशन आदि की समीक्षा करना तथा समय-समय पर वित्तीय नियमों एवं प्रावधानों से कोषागारों को अवगत कराना तथा कार्य की गुणवत्ता को बढ़ाने हेतु दिशा-निर्देश जारी करना ।