इतिहास और पृष्ठभूमि

कोषागार निदेशालय ने अपने वर्तमान स्वरूप में आने से पूर्व एक लम्बा सफर तय किया है। कोषागार निदेशालय की स्थापना दिनांक 03.04.1965 को हुई थी। स्थापना से पूर्व कोषागारों के प्रशासनिक नियंत्रण संबंधी समस्त कार्य शासन के वित्त विभाग द्वारा किया जाता था। कोषागारों के बढ़ते हुये दायित्वों को देखते हुये शासन द्वारा अलग कोषागार निदेशालय की स्थापना का निर्णय लिया गया जिसके परिणाम स्वरूप दिनांक 03.04.1965 को कोषागार निदेशालय की स्थापना हुई तथा श्री एन0सी0 रे उपसचिव को, जो उत्तर प्रदेश  सचिवालय के अधिकारी थे, प्रथम निदेशक नियुक्त किया गया। श्री रे के सेवानिवृत्त के उपरान्त दिनांक 17.02.1968 को श्री बलवन्त सिंह को निदेशक कोषागार बनाया गया। निदेशक की नियुक्ति के पश्चात सचिवालय सेवा के श्री भगवत सिंह चौधरी को उप निदेशक एवं श्री बीरेन्द्र बहादुर श्रीवास्तव को आशुलिपिक के पद पर नियुक्त किया गया जिसके उपरान्त कोषागार में कार्य संचालन प्रारम्भ हुआ। कोषागार निदेशालय के कार्यालय के प्रथम कार्यालय अधीक्षक श्री केदान नाथ जैन थे। निदेशालय की स्थापना के प्रारम्भिक दिनों में निदेशालय का कार्यालय सचिवालय में ही स्थापित था लेकिन कार्यालय अधीक्षक, उप निदेशक की नियुक्ति होने के उपरान्त कोषागार निदेशालय को वर्ष 1966 में लालबाग, लखनऊ में किराये के भवन में स्थानान्तरित किया गया जहां स्वतंत्र रूप से कोषागार निदेशालय का कार्य प्रारम्भ हुआ। कोषागार निदेशालय के प्रगति में सर्वप्रथम नियुक्त कार्यालय अधीक्षक श्री केदार नाथ जैन एवं कोषागार निदेशालय के तत्कालीन कर्मचारी श्री सी0एफ0 डैनियल, श्री एन0सी0 सक्सेना, श्री बी0डी0 सक्सेना आदि का अथक योगदान रहा। प्रारम्भिक वर्षो में नियुक्त सभी कर्मचारियों ने कोषागार निदेशालय को अपने परिश्रम एवं लगन से प्रदेश का एक प्रतिष्ठित निदेशालय में परिवर्तित करने में महत्वपूर्ण योगदान किया। कोषागार निदेशालय के इन सभी कर्मचारियों के अथक परिश्रम एवं लगन से ही वर्तमान कोषागार निदेशालय का स्वरूप निखर कर सामने आया।

कोषागारों का दायित्व एवं महत्व धीरे-धीरे बढ़ता गया। प्रदेश की बढ़ते कार्यकलापों के कारण कोषागार निदेशालय की जिम्मेदारियां भी बढ़ती गयी जिसके क्रियान्वयन हेतु कोषागार निदेशालय का कार्यालय भवन छोटा पड़ने लगा। उसी समय  1977 में जवाहर भवन, लखनऊ बनकर तैयार हो रहा था जिसके दसवें तल पर कोषागार निदेशालय को स्थानान्तरित किया गया।

उन्नीस सौ नब्बे के दशक में कोषागारों का परम्परागत स्वरूप बदलते हुये नई तकनीक अपनाने हेतु एन0आई0सी0 के सहयोग से प्रदेश के कोषागारों के कम्प्यूटरीकरण का कार्य निदेशालय के पर्यवेक्षण में प्रारम्भ किया गया तथा वर्ष 1998 तक सभी कोषागारों का कम्प्यूटरीकरण पूर्ण कर कोषागार के लेखे कम्प्यूटर से ही तैयार किये जाने लगे। निदेशालय के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में प्रदेश के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पेंशन का डाटावेस बना कर पेंशन भुगतान सीधे पेंशनरों के खातों में कोषागार द्वारा किया जाने लगा। वर्ष 2013-14 से कोषागारों में आनलाइन पेमेंट की व्यवस्था प्रारम्भ की गई जो बहुत उपयोगी सिद्ध हुई है।

कोषागार निदेशालय की स्थापना से लेकर निदेशालय का वर्तमान स्वरूप स्थापित करने में स्वर्गीय श्री चन्द्रिका प्रसाद, स्व0 श्री बहोरी लाल, स्व0 श्री महेन्द्र कुमार सिंह, स्व0 श्री प्रेम शंकर, स्व0 श्री राम शंकर सिंह, स्व0 श्री नन्हे लाल, श्री एस0पी0 मुखर्जी आदि कर्मचारियों के अथक परिश्रम एवं लगन का कोषागार निदेशालय आभारी है जिनके अमूल्य योगदान के बिना कोषागार निदेशालय की यह गरिमा पूर्ण स्थिति नहीं बन सकती थी। आशा ही नहीं वरन विश्वास है कि कोषागार निदेशालय इसी प्रकार दिनों-दिन प्रगति के पथ पर चलता रहेगा।