कोषागार निदेशालय के बारे में

प्रदेश के कोषागारों पर नियंत्रण और पर्यवेक्षण के लिए कोषागार निदेशालय की स्थापना सन् 1965 में हुई, जिसका मुख्यालय लखनऊ बनाया गया। कोषागार निदेशक को इस विभाग का प्रमुख घोषित किया गया और उनकी सहायता के लिए एक अतिरिक्त निदेशक, दो संयुक्त निदेशक, एक उप निदेशक और एक विशेष कार्यकारी अधिकारी (ओ एस डी) कार्यरत किये गए। यह समस्त अधिकारी उत्तर प्रदेश वित्त एवं लेखा सेवा से सम्बद्ध हैं। निदेशक को सहायक लेखा अधिकारी, सहायक कोषागार अधिकारी, उप कोषागार अधिकारी, नई दिल्ली स्थित वेतन एवं लेखा कार्यालय के कमचारियो तथा जवाहर भवन लखनऊ स्थित कोषागार के कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए भी अधिकृत किया गया है। निदेशक को इन अधिकारियों के कैडर प्रबंधन का विशेष अधिकार भी दिया गया है।

  • वित्त विभाग को सलाह देना कि वित्त और लेखा सेवाओं की उपयोगिता विभाग में, निगमों में तथा उपक्रमों में कैसे बढाई जाए, तथा लेखा के नियमों और इनकी प्रक्रियाओं में किस प्रकार सुधार लाया जाए।
  • कोषागार, कोषागार निदेशालय तथा क्षेत्रीय संयुक्त निदेशक कोषागार के अधिकारियों के बजट का नियंत्रण करना।
  • उत्तर प्रदेश वित्त एवं लेखा सेवाओं के समूह 'बी' के अधिकारियों के स्थानान्तरण, प्रतिनियुक्ति, भवन निर्माण और भवन की मरम्मत के लिए अग्रिम धनराशि, वाहन के लिए अग्रिम धनराशि, 60 दिनों के लिए अर्जित अवकाश, 3 माह तक के चिकित्सा अवकाश की अनुमति देना।
  • वित्त एवं लेखा सेवा के अधिकारियों, सहायक लेखा अधिकारी, सहायक कोषागार अधिकारी, उप कोषागार अधिकारी, निदेशालय कर्मचारी, कोषागार के कर्मचारियों को रु 10,000 तक के चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति; वित्त एवं लेखा सेवा के सभी अधिकारियों के अवकाश नकदीकरण; वित्त एवं लेखा सेवा के सभी अधिकारियों तथा उपरोक्त श्रेणी के सभी सेवानिवृत्त व्यक्तियों के समूह बीमा योजना के दावों का अग्रसारण।
  • पेंशन स्वीकृति कार्य एव समूह बीमा योजना कार्य का विकेंद्रीकरण एवं निगरानी करना।
  • वित्त एवं लेखा सेवा, सहायक लेखा अधिकारी, उप कोषागार अधिकारी, सहायक कोषागार अधिकारी और कोषागार कर्मचारियों के प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम की निगरानी करना।
  • वित्त एवं लेखा सेवा के समूह 'बी' के अधिकारियो की आचरण पत्रिका में प्रविष्टि करना और उसे स्वीकृत करना।
  • वित्त एवं लेखा सेवा के अन्य निदेशकों के अतिरिक्त सभी अधिकारियों के जी पी एफ पेशगी और निकासी की स्वीकृति, जी पी एफ के अंतिम भुगतान के 90 प्रतिशत का भुगतान, जमा से सम्बद्ध बीमा योजना के अंतर्गत भुगतान। कोषागार निदेशक को यह कार्य सौपा गया है कि वह कोषागार निदेशालय, पेंशन निदेशक, निदेशक विभागीय लेखा, निदेशक पंचायती राज (लेखा), निदेशक वित्तीय प्रबंधन, प्रशिक्षण एवं अनुसन्धान संस्थान के जी.पी.एफ के अंतिम भुगतान को स्वीकृत करें।
  • उत्तर प्रदेश वित्त एवं लेखा सेवा के अधिकारियो की सेवा में, पेंशन के उद्देश्य से सी.एस.आर. को जोड़े।
  • उत्तर प्रदेश वित्त एवं लेखा सेवा के अधिकारियो को यू.पी.एस.सी., लोक सेवा आयोग आदि की परीक्षा/साक्षात्कार देने के लिए `अनापत्ति प्रमाण पत्र’ देना।
  • अतिरिक्त निदेशक कोषागार, कोषागार अधिकारी एव सहायक लेखा अधिकारी के कार्य का निरीक्षण करना।
  • कोषागारों, उप कोषागारों एवं अतरिक्त निदेशक कोषागार के कार्यालयों में कंप्यूटरीकरण का निरिक्षण करना।
  • ए.जी. यू.पी. (महालेखाकार उ.प्र.) के साथ कार्य समन्वय स्थापित करना।

मंडलीय अतरिक्त निदेशक कोषागार और पेंशन

समय के साथ-साथ कोषागारों में लेन देन की संख्या कई गुना बढ़ गई है अतः यह आवश्यक हो गया है कि इनके कार्य पर उचित नियंत्रण रखा जाए तथा पर्यवेक्षण किया जाये तथा काम में गुणवत्ता लायी जाए। इसलिए मंडलीय स्तर पर अतरिक्त निदेशक कोषागार के कार्यालय स्थापित किये गए हैं, जिनके कार्य और जिम्मेदारिया निम्न प्रकार है:

  • अपने मंडल के कोषागारो का वर्ष में दो बार निरीक्षण करना और इसके दौरान पाई गई अनियमितताओं को दूर करना।
  • यह सुनिश्चित करना कि लेखा समय पर ए.जी. को प्राप्त हो जाए तथा कोषागार द्वारा वित्त सांख्यकीय निदेशालय को निविष्टियां भेज दी जाएँ।
  • उप कोषागार अधिकारी, सहायक लेखा अधिकारी तथा मुख्य रोकड़िया का मंडल के अंदर स्थान्तरण करना।
  • सहायक लेखा अधिकारी/ उप कोषागार अधिकारी जो मंडल के कोषागारो और उप कोषागारो में हो रहे कंप्यूटरीकरण की जांच और निरिक्षण करते हैं, उनका अर्जित अवकाश, अवकाश नगदीकरण, चिकित्सीय अवकाश तथा जी.पी.एफ. से अस्थाई पेशगी देना।
  • मंडल के सभी विभागों और कार्यालयों से सम्बंधित लंबित लेखा परीक्षण कार्यों का समय से निस्तारण।
  • मंडल के सभी शासकीय कार्यालयों में वेतन निर्धारण आतंरिक लेखा परीक्षण, वित्त और लेखा सम्बन्धी अन्य कार्यो का निरीक्षण।
  • भारत सरकार द्वारा भुगतान दावो के वाउचरों का अभिलेखन सुनिश्चित करना।
  • सी.सी.एल. /डी.सी.एल. का कड़ाई से अनुपालन करना।
  • कोषागारों द्वारा यह सुनिश्चित करना कि स्टाम्प के लिए मांग समय से उचित अधिकारियों को दिया जाए।
  • शिकायतों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करना।
  • अप्रैल 1, 2000 से सभी वर्ग बी और सी कर्मचारियों को पेंशन, ग्रेच्युटी तथा पेंशन का नकदीकरण स्वीकृत करना।
  • कोषागार अधिकारियों की चरित्र पंजिका लिखने के लिए समीक्षा अधिकारी के रूप में काम करना।

कोषागार अधिकारी

मुख्य कोषागार अधिकारी अधिकतर मंडल मुख्यालय स्थित कोषागारो में नियुक्त हैं और अधिकांश जिला कोषागारों को वरिष्ठ कोषागार अधिकारी स्तर पर प्रोन्नत कर दिया गया है। कोषागार अधिकारी कार्यालय का प्रमुख है, तथा कोषागार के अंतर्गत कोषागार और उप कोषागार के लिए आहरण और संवितरण अधिकारी (ड्राइंग एंड डिसबर्सिंग ऑफिसर) है। कोषागार का अधिशाषी नियंत्रण कोषागार अधिकारी में निहित है। इनके कार्य मुख्यतः इस प्रकार हैं: उचित मंजूरी समस्त प्रकार के बीजको (बिल) को भुगतान के लिए अधिकृत करना; राज्य कर्मचारियों के पेंशन का भुगतान, भारत सरकार के नागरिक और सैन्य पेंशन; स्टाम्प, अफीम तथा अन्य कीमती वस्तुओं को कोषागार में उचित सुरक्षा में रखना; महालेखाकार के उपयोग में लाने के लिए कोषागार और उप कोषागार में प्राप्त हुई और भुगतान की गयी सभी शासकीय धनराशि का अनुरक्षण करना। दिनांक जून 6, 1994 के एक सरकारी आदेश के द्वारा कोषागार अधिकारी को बजट नियंत्रण की भी जिम्मेदारी दी गई है। सरकारी कर्मचारियों के समूह बीमा सम्बन्धी कार्य भी जिला कोषागार को स्थान्तरित कर दिया गया है। कोषागार अधिकारी से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वह जिले के उप कोषागारों का निरीक्षण करे। वह सरकार और महालेखाकार के प्रति हर उन दावों की वैधता के लिए उत्तरदायी है जो उसने भुगतान के लिए पारित किये हैं। प्रतिदिन के कार्यों के लिए वह जिलाधिकारी के आधीन कार्य करता है।

एक कोषागार को दो अनुभागो में बांटा गया है एक नगद भुगतान जो प्रमुख रोकड़िया के अंतर्गत आता है और दूसरा लेखा अनुभाग जो सहायक कोषागार अधिकारी के आधीन है। प्रमुख रोकड़िया नगद अनुभाग का प्रभारी होता है और वह नगद, स्टाम्प तथा अन्य कीमती वस्तुओं की सुरक्षा के लिए उत्तरदायी है जो दोहरे चाभी वाले ताले में रखी जाती है। इन चाभियो का एक सेट प्रमुख रोकडिया के पास होता है और दूसरा सेट कोषागार अधिकारी/ वरिष्ठ कोषागार अधिकारी /प्रमुख कोषागार अधिकारी के पास रहता है। उप कोषागार में दोहरे चाभियो वाले ताले की चाभी का एक सेट सहायक रोकड़िया और दूसरा सहायक कोषागार अधिकारी के पास रहता है। प्रमुख रोकडिया एक चाभी वाले ताले का भी प्रभारी होता है। लेखा अनुभाग सभी सरकारी प्राप्तियों और भुगतान का हिसाब रखता है साथ ही पर्सनल लेजर अकाउंट (पी.एल.ए.) सरकारी जमा और नकद-व-उधार (कैश एंड क्रेडिट) का भी हिसाब रखता है।