सिटीजन चार्टर

कोषागार नियमो के तहत हर जिले में एक कोषागार होगा जो जिलाधिकारी के प्रभार में होगा, और जो उसका तत्काल अधिशाषी नियंत्रण एक कोषागार अधिकारी को सौंप सकता है। जिलाधिकारी और कोषागार अधिकारी नियम की प्रक्रियाओं के अनुपालन के लिए जिम्मेदार होंगें, और सभी विवरणियों के समय पर प्रस्तुति के लिए भी जिम्मेदार होंगें।

कोषागार के वह कार्यक्षेत्र जिनमे आम जन की भागीदारी है, उन्हें निम्नलिखित वर्गों में रखा जा सकता है-

कोषागार अधिकारी तथा अन्य कर्मचारी (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को छोड़ कर) कार्यालय खुलने के निर्धारित समय से पांच मिनट पूर्व कार्यालय में आयंगे। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी 30 मिनट पहले आकर कार्यालय खोलकर सफाई आदि करेंगे।

कोषागार के सभी कर्मचारी अधिक से अधिक 10 बज कर पांच मिनट तक अपनी सीट पर उपस्थित होकर अपना कार्य प्रारम्भ कर देंगे।

दोपहर 2.30 से 3.00 के बीच भोजन का अवकाश होगा जिसके बाद कर्मचारी अपना कार्य पुनः प्रारम्भ कर देंगे।

सहायक कोषागार अधिकारी/ कोषागार अधिकारी द्वारा इस समय सारणी का नियमित परीक्षण किया जायेगा।

डाक एक सहायक लेखाकार द्वारा प्राप्त की जायगी जिसके लिए उसे एक अलग काउंटर दिया जाएगा। सहायक लेखाकार डाक प्राप्त होते ही उसे कंप्यूटर में अंकित करेगा। एन.आई.सी. इस के लिए एक कंप्यूटर प्रोग्राम विकसित करेगा।

डाक चार भागो में बाटी जायगी- 1. पी.पी.ओ., जी.पी.ओ., सी.पी.ओ. आदि से सम्बंधित, 2. सरकार, महालेखाकार, मंत्री, लोकायुक्त संदर्भित, डी.ओ. पत्र, 3. याचिका, पूछताछ, अधिष्ठान, 4. अन्य डाक।

पंजीकृत पत्र की दशा में प्राप्तकर्ता द्वारा पंजीकरण संख्या भी लिखी जाएगी। सहायक कोषागार अधिकारी दिन में दो बार 12.30 बजे और 4.30 बजे सम्बंधित व्यक्ति को डाक मार्क (चिन्हित ) करेगा और कोषागार अधिकारी द्वारा उन पर अपने हस्ताक्षर किये जायेंगे।

सहायक कोषागार अधिकारी/ कोषागार अधिकारी प्रति दिन डाक का परीक्षण करेंगे।

जिला कोषागारों में बिल पारित करने के कार्य को अनुदान के अनुसार बिल पारित करने वाले लेखाकारों (बी.पी.ए.) के बीच बाँट दिया जायेगा और वे जो अनुदान के अनुसार बिल पास करने और चेक सौपने के लिए जिम्मेदार होंगे।

बी.पी.ए. 11 बजे से 2.30 बजे अपरान्ह के बीच बिल लेंगे और चेक देंगे (या फिर उस कार्य अवधि में जो जिला अधिकारी/कोषागार अधिकारी द्वारा निर्धारित की जाये). बिल केवल उस निर्धारित कोषागार रजिस्टर पर ही प्राप्त किये जायेंगे जो सम्बंधित बी.पी.ए. द्वारा डी.डी.ओ. को जारी किये गए हैं।

कोषागार में कार्य करने का समय तथा बिल प्राप्त करने का समय उचित स्थान पर दर्शाया जाएगा।

देरी से बचने के लिए जो बिल कोषागार में प्रस्तुत किये जायेंगे उनकी एक प्रारंभिक जांच की जाएगी और जांच के दौरान यदि कोई आपत्ति पाई जाती है तो उन्हें बिना प्राप्त किये ही वापस कर दिया जाएगा।

समस्त प्राप्त किये गए बिलों की बी.पी.ए. द्वारा विस्तार से जांच की जाएगी, साथ ही वह लेखा का शीर्षक (अकाउंट हेड), योजनागत / योजनेतर, मतदेय/चार्ज्ड, सोर्स कोड, बजट अनुदान आदि की जांच भी कंप्यूटर पैर ऑनलाइन उपलब्ध बजट से सम्बंधित सामग्री के अनुसार करेगा।

स्वयं संतुष्ट हो जाने के बाद ही बी.पी.ए. बिल पर भुगतान आदेश करके, अपने हस्ताक्षर करने के बाद वारंट रजिस्टर तथा कंप्यूटर द्वारा बनाई चेक के साथ सहायक कोषागार अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेगा।

सहायक कोषागार अधिकारी बिल की जांच करेगा और जाँच की निशानी के रूप में अपने हस्ताक्षर करेगा। पेंशन बिल के अतिरिक्त रु 1000 या उससे कम के सभी बिल सहायक कोषागार अधिकारी द्वारा पास किये जा सकते हैं।

रु 1000 से अधिक के बिल और पेंशन बिल कोषागार अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किये जायेंगे जो भुगतान आदेश, वारंट रजिस्टर और चेक पर अपने हस्ताक्षर करेगा अथवा बिल पर अपनी टिपण्णी देगा।

बिल से सम्बंधित जो भी चेक जारी की गई हैं वह कोषागार में प्राप्त होने की तारीख से सामान्यतः दो दिनों के भीतर ही विभाग को वापस हो जानी चाहिए किन्तु किसी भी दशा में यह सीमा तीन दिनों से अधिक नहीं होनी चाहिए। चेक के सभी विवरण कोषागार की पंजिका में दर्ज किये जाने चाहिए जो डी डी ओ को जारी/ उपलब्ध किये गए हैं।

कोषागार में एक रजिस्टर बनाया जायेगा जिसमे समस्त स्व-आहरण अधिकारियों के नाम, भुगतान वेतन प्रमाण (पे स्लिप), आहरण, वसूली, ऋण आदि दर्ज किये होंगे। .
स्व-आहरण अधिकारियों द्वारा सही आहरण सुनिश्चित करने के लिए, कोषागार में प्रस्तुत किए गए बिल भुगतान करने के पहले इस रजिस्टर से मिलाये जायेंगे।

इस रजिस्टर तथा वारंट रजिस्टर की प्रत्येक प्रविष्टि के लिए हस्ताक्षर किये जायेंगे।

कोषागार अधिकारी इन अधिकारियो से आय-कर काटने के लिए भी जिम्मेदार होगा।

वेतन प्रमाण (पे स्लिप) का रजिस्टर कोषागार में 12 वर्षों तक संरक्षित रखी जाएगी।

दिनांक 6 जून, 1994 के शासकीय आदेश के अनुसार, कोषागार अधिकारी अनुदान के अनुसार बजट नियँत्रित करने के लिए जिम्मेदार होगा। बिल की ऑनलाइन चेकिंग भी की जाएगी जिससे 15-अंकों के कोड, योजना/योजनेतर, मतदेय/चार्ज्ड, समेकित निधि/ आकस्मिक निधि / सार्वजानिक लेखा, बजट आदि को पहले से उपलब्ध बजट सामग्री की सहायता से जांच कर सुनिश्चित किये जायेंगे।

सरकारी देय राशि बैंक और उप कोषागार में तीन प्रतियों के चालान के साथ प्रस्तुत की जाएगी। चालान की `विभागीय प्रति’ और `कोषागार प्रति’ रोजाना के लेखा के साथ कोषागार को भेजनी होगी। कोषागार अधिकारी चालान की `विभागीय प्रति’ विभागीय अधिकारी को अगले कार्यकारी दिवस में चालान के विवरण और जमा किये गये ब्योरे के साथ भेज देगा. व्यापार कर के मामले में चालान चार प्रतियों में प्रस्तुत किया जाएगा।

प्राप्ति का सत्यापन: जमाकर्ता के आवेदन पर, कोषागार अधिकारी अगले तीन कार्यकारी दिवस में लिखित रूप से यह प्रमाणित करेगा की वास्तव में धन राशि में जमा हुई है कि नहीं।

  • चैकबुक का स्टॉक कोषागार अधिकारी द्वारा रखा जायगा। चैकबुक मिलने के बाद इसकी गहनता से जांच की जाएगी और और इसके पन्ने गिने जायेंगे।
  • सभी चेक सहायक लेखाकार/लेखाकार द्वारा प्राप्त किये जायेंगे जो इसकी जांच के बाद भुगतान आदेश को इसके पीछे अंकित करेंगे और अपने हस्ताक्षर करेंगे। इसके उपरांत लेखाकार खाते में उपलब्ध धनराशि की जांच करेंगे और फिर इस चेक को सहायक कोषागार अधिकारी के सम्मुख प्रस्तुत करेंगे।
  • सहायक कोषागार अधिकारी अपनी संतुष्टि के बाद भुगतान आदेश के नीचे अपने हस्ताक्षर करेंगे और इसे कोषागार अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
  • कोषागार अधिकारी अपनी संतुष्टि के बाद भुगतान का आदेश करेंगे या अपनी टिप्पणी लिखेंगे।
  • कोषागार में चेक प्राप्त होने के बाद तीन दिनों के अंदर सम्बंधित विभाग को वापस भेजनी होगी।
  • व्यक्तियों को जारी किये चेक उनके उस बैंक के द्वारा प्रस्तुत किये जायेंगे जिसमे उनका खाता है।
  • कोषागार अधिकारी विभागों की पी.एल.ए. पास बुक को सत्यापित कर साधारणतयः उसी दिन स्व आहरण अधिकारी को वापस भेज देगा।

क्रेडिट लिमिट प्राप्त होने के तीन कार्य दिवसों के भीतर ही कोषागार अधिकारी द्वारा बैंक को सूचित की जाएगी।

इन लिमिट के तहत जो चेक जारी किये गए है उनका बैंक द्वारा सीधे भुगतान कर दिया जाएगा किन्तु यदि निर्धारित सीमा से अधिक भुगतान होता है तो इसे ओवरड्रा माना जायेगा और इस अनियमितता की ओर अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया जायेगा।

कोषागार अधिकारी सी.सी.एल. /डी.सी.एल. जारी कर आगामी माह की दस तारीख को प्रेषक विभागों को भेज देगा।

प्रत्येक धन जो भी जमा होने के लिए आता है तुरंत प्रपत्र 54 पंजिका में दर्ज किया जाना चाहिए और उसकी संख्या लिखी जानी चाहिए। कोषागार अधिकारी को ध्यानपूर्वक प्रत्येक विवरण, राशि जांच कर अपने हस्ताक्षर करने चाहिए।

किसी भी व्यक्ति को मिलने वाली वह धनराशि, जो जिलाधिकारी, मजिस्ट्रेट, या जज के खाते में उस विभाग की ओर से आई है जिसके रजिस्टर में वह अंकित है, उसका पुनर्भुगतान कोषागार अधिकारी द्वारा उस व्यक्ति को इसकी प्राप्ति के तीन दिन के अन्दर करना होगा।

राजस्व की वापसी, जुर्माना आदि की वापसी कोषागार अधिकारी के आदेश पर बैंक द्वारा की जाएगी।

सरकारी वचन पत्र जिस पर व्याज देय है, कोषागार अधिकारी के सामने प्रस्तुत किये जाने चाहिए, जो उसकी जांच पड़ताल करके तीन दिनों के भीतर बैंक के लिए भुगतान आदेश बना देगा।

  • जिले की मासिक और त्रैमासिक आवश्यकता के अनुसार सभी प्रकार के स्टाम्प का एक मांगपत्र कोषागार अधिकारी द्वारा बनाया जायेगा और इसे राजस्व परिषद को भेजा जायेगा, और इसकी एक प्रति मंडलीय डिपो को दो तिमाही अग्रिम भेजी जाएगी।
  • कोषागार अधिकारी मंडलीय डिपो से टिकट प्राप्त करेगा।
  • कोषागार स्टाम्प की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है, और उन्हें दो तालों वाली सुरक्षा में रखा जाएगा जिसकी एक चाभी प्रमुख रोकड़िया के पास और दूसरी चाभी कोषागार अधिकारी के पास रहेगी।
  • कोषागार विक्रेताओ को और अन्य मांग करने वालो को सीधे स्टाम्प बेचेगा। कोषागार अधिकारी विक्रेताओ के लिए स्टाम्प बेचने का दिन और समय सूचना पट पर दर्शाएंगे।
  • कोषागार उप-कोषागारो को भी स्टाम्प की आपूर्ति करेगा।
  • स्टाम्प के विक्रय पर छूट: कोषागार अधिकारी टिकट बेचने वालो को उनके द्वारा भुगतान की गई राशि में कटौती कर के छूट देगा।
  • टिकटों के कम ज्यादा का हिसाब नियमित रूप से राजस्व परिषद तथा महालेखाकार को भेजा जायगा।

कोषागार में अन्य विभागों के कीमती सामानों को नियम के अनुसार दो चाभी वाले ताले में रखा जायगा और जमा किये गए सामान की रसीद दी जायेगी। कोषागार अधिकारी समय समय पर इन सामानों का सत्यापन भी करेंगे।

  • जब एक पी.पी.ओ. कोषागार में प्राप्त किया जाता है तो उसे तुरंत ही इंडेक्स रजिस्टर में दर्ज किया जायेगा और इस पर इंडेक्स रजिस्टर का क्रमांक कोषागार अधिकारी के हस्ताक्षर के साथ अंकित किया जायेगा।
  • यदि पेंशन धारक एक सप्ताह के भीतर अपना भुगतान लेने नहीं आता तो कोषागार अधिकारी को पेंशन धारक को उससे मिलने का समय और दिन लिखित रूप से सूचित करना चाहिए।
  • कोषागार अधिकारी को पहले पी.पी.ओ. का भुगतान करते समय कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए ताकि कम समय में सही भुगतान हो।
  • कोषागार अधिकारी द्वारा उन सभी पेंशन धारको, जिन्होंने जवाहर भवन योजना चुनी है, के बैंक में महीने के अंतिम कार्य दिवस से तीन कार्य दिवस पहले पेंशन भेज देनी चाहिए।
  • कोषागार अधिकारी सभी पेंशन धारको, जो उसके कोषागार से पेंशन लेते हैं, का नवम्बर माह में सत्यापन करेंगे या फिर जो समय जिला अधिकारी और कोषागार अधिकारी द्वारा निश्चित किया जायेगा।
  • कोषागार अधिकारी महिला पेंशन धारको से विवाहित न होने का निर्धारित अर्ध वार्षिक प्रमाण पत्र दिसम्बर और जून माह में लेंगे जिनकी पेंशन शादी करने के कारण रोक दी गई है।
  • कोषागार अधिकारी नौकरी न होने का प्रमाण पत्र नियमों के अनुसार मई और नवम्बर माह में प्राप्त करेंगे।
  • कोषागार अधिकारी उन सभी पेंशन धारको से स्त्रोत पर आय-कर काटने के भी जिम्मेदार होंगे जो उसके कोषागार से पेंशन ले रहे है।
  • कोषागार अधिकारी को पहली और दूसरी सूची का लेखा माह की 13 और अगले माह की 5 तारीख तक प्रदेश के महालेखाकार के पास प्रस्तुत कर देना चाहिए।
  • कोषागार अधिकारी को महालेखाकार को लेखा भेजने उसकी सत्यता की जांच करने चाहिए और उस पर हस्ताक्षर करना चाहिए।
  • कोषागार अधिकारी को कोषागार में आई निविष्टियों का विवरण वित्तीय सांख्यकीय निदेशलय को अगले माह की 8 तारीख तक भेज देना चाहिए।
  • कोषागार अधिकारी डी.डी.ओ.से जिले में कार्यरत सरकारी कर्मचारियों की अर्द्ध-वार्षिक सूचना निर्धारित प्रारूप में प्राप्त कर मई और नवम्बर माह में वित्तीय सांख्यकीय निदेशलय को भेज देंगे।
  • डी.डी.ओ. संराधन प्रपत्र: कोषागार अधिकारी जिले में विभिन्न डी.डी.ओ. द्वारा किये गए आहरण का एक प्रपत्र तैयार करेंगे तथा इसकी एक प्रति इनको उपलब्ध कराएँगे और उन अंतरों का समाधान करेंगे जिनकी ओर इन लोगो ने इनका ध्यान आकर्षित किया है।
  • नियमानुसार कोषागार अधिकारी खोई हुई चेक का भुगतान न होने का प्रमाण पत्र नियमानुसार जारी करेंगे।
  • कोषागार अधिकारी जिले की प्रति दिन की आय और भुगतान की स्थिति से कोषागार निदेशालय को अवगत कराएँगे।
  • कोषागार अधिकारी सेवानिवृत्त हो रहे सरकारी कर्मचारियो को 90 प्रतिशत जी.पी.एफ़. देने के लिए 5 वर्षो की गणना उन विभागों की करेंगे जिनके पास अपना स्वयं का वित्त एवं लेखा संगठन नहीं है।
  • कोषागार अधिकारी पेंशनधारक संघो, बैंक अधिकारियों और आहरण एवं संवितरण अधिकारियों के साथ मासिक बैठक करेंगे जिससे संवादहीनता दूर की जा सके तथा बेहतर संपर्क बनाये जा सके।
  • कोषागार अधिकारी को वी.डी.एम. सत्यापित कर प्रतिमाह महालेखाकार को भेजनी चाहिए। यदि इनमे कोई त्रुटि है तो इसे पहले बैंक द्वारा ठीक किया जाना चाहिए इसके उपरांत इसे कोषागार अधिकारी द्वारा प्रति-हस्ताक्षररित करना चाहिए।
  • यदि कोई व्यक्ति /अधिकारी/ पेंशन धारक कोषागार में अपने किसी कार्य के पूरा होने में परेशानी महसूस करता है तो उसे प्रभारी कोषागार अधिकारी अथवा जिला अधिकारी से संपर्क करना चाहिए।
  • यदि जिला स्तर पर की गई कार्याही से वह संतुष्ट नहीं है तो वह अपर निदेशक कोषागार अथवा मंडलीय आयुक्त से संपर्क कर सकता है।
  • अधिक उपायों के लिए निदेशक कोषागार, उत्तर प्रदेश, लखनऊ से संपर्क किया जा सकता है।