उन्नत स्वचालित प्रणाली

समय के बदलाव के चलते, हम विभाग एवं नागरिकों के एक बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर हैं। विभाग में कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाने के लिए कुछ आवश्यक सुधार किए गए हैं:-

1. सरकारी भुगतान का कम्प्यूटरीकरण

वर्ष 2012 में, सरकार ने सभी सरकारी भुगतानों के लिए ई-पेमेंट प्रणाली को शुरु किया और फलस्वरूप कोषागार चेक प्रचलन से गायब हो गये। छोटे भुगतानों के लिए बैंको द्वारा डीडीओ के हित में बैंकर चेक लाया गया। विफल ट्रांज़ेक्शन की स्थिति में बैंकों द्वारा बैंकर चेक भी निर्गमित किए गयें। इस प्रणाली में, लाभार्थी फाईल और लेनदेन फाईलों को एसबीआई/इलाहाबाद बैंक की नेट पेमेंट, वेबसाईट पर डीडीओ द्वारा अपलोड की जाती हैं। एक बिल पास करने के बाद, कोषागार अपने भुगतानों को बैंक की वेबसाईट पर अधीकृत करता है।

ई-भुगतान करते समय, अगर लाभार्थी एसबीआई के अतिरिक्त किसी और बैंक का खाता धारक है तो, ऐसा आकलन है कि बैंक आईएफएस कोड की प्रमाणिकता को नहीं परख पाते हैं, साथ ही ट्रांज़ेक्शन करते समय लाभार्थी के खाता नंबर को परखने में भी दिक्कत आती है। फलस्वरूप काफी अधिक मात्रा में ट्रांज़ेक्शन फेल हो जाते हैं, जिसके बाद बैंक द्वारा बैंक ड्राफ्ट दिये जाते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए, सार्वजनिक वित्त अनुश्रवण प्रणाली (पीएमएफएस) के इस्तेमाल को शुरु किया गया, जिसका 100 से अधिक बैंकों के साथ एमओयू हस्ताक्षरित है, जिससे लाभार्थी फाईल की प्रमाणिकता की पुष्टि होती है।

बिल तैयार करने और बिल जमा करने का कम्प्यूटरीकरण:-

कम्प्यूटरीकरण के पहले, सभी बिल डीडीओ द्वारा मैन्युअली बनाए तथा जमा कराए जाते थें। लेकिन कम्प्यूटरीकरण के बाद, सभी सरकारी विभागों के लिए बिल भुगतान सॉफ्टवेयर बनाया गया, जिसमें कोषागार में या उससे बाहर बिल बनाने की सुविधा उपलब्ध है। केवल एनपीएस पेबिल ही कोषागार में तैयार करना आवश्यक है। जो बिल या तालिका सॉफ्टवेयर के माध्यम से तैयार की जाती है, उन्हें पे-बिल की इनर-शीट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, जिसका कवर पेज कोषागार बिल फॉर्म पर मैन्युली तैयार किया जाता है।

राज्य स्तर पर सभी कर्मचारियों के अपडेटेड डाटाबेस के रखरखाव के लिए, यह आवश्यक है कि कोषागार में ही सारे पे-बिल तैयार किए जाएं। लेकिन, बिल तैयार करने का केंद्रीकरण डीडीओ और कोषागारों के लिए काफी असुविधाजनक है। इस समस्या को दूर करने के लिए वेब आधारित एप्लीकेशन का सृजन किया गया है। इस प्रणाली में, डीडीओ को इसका एक्सेस देना प्रस्तावित है, ताकि वे सभी बिलों को तैयार कर सकें और ऑनलाईन जमा कर सकें। डीडीओ कर्माचारी डाटाबेस को ऑनलाईन भी बना सकते हैं एवं उसे जरूरत के अनुसार अपडेट भी कर सकते हैं। इसके द्वारा डीडीओ ऑनलाईन बिल टोकन नंबर भी बना सकते हैं, और इस प्रणाली के द्वारा ई-भुगतान के लिए ट्रांजिक्शन फार्म भी जनरेट किए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त बिल के कवर पेज भी कम्प्यूटर द्वारा बनाए जा सकते हैं और साथ ही कोषागार अब बिलों को मैन्युअली पोस्ट नहीं करेगा, बल्कि ऑटो पोस्टिंग विकल्प को चुनेगा और बिल पास करेगा।

पेंशन (ई-पेंशन) का कम्प्यूटरीकरण

वर्तमान में, पेंशन मंजूरी प्रक्रिया कम्प्यूटरीकृत है। सर्विस बुक के साथ साथ, पेंशन पेपर भी कार्यालय हेड द्वारा पेंशन निदेशालय या खंडीय अपर निदेशक, कोषागार एवं पेंशन कार्यालय को प्रेषित की जाती है। यह कार्यालय सॉफ्टवेयर की मदद से पीपीओ/जीपीओ/सीपीओ बनाते हैं और उसे संबंधित कोषागार को प्रेषित करते हैं, जहां पेंशनर को भुगतान किया जाता है। पेंशन निदेशालय द्वारा दिए गए प्रस्ताव में, कार्यालय अध्यक्ष पेंशन केस को वेब आधारित एप्लीकेशन के माध्यम से ऑनलाईन जमा कर सकते हैं। इसलिए कर्माचरी डाटाबेस के आधार पर, जो पेबिल बनाने के उद्देश्य के लिए पहले से कोषागार सर्वर पर उपलब्ध है,इस एप्लीकेशन की मदद से पेंशन स्वीकृत प्राधिकरण, पीपीओ जनरेट करेगा एवं संबंधित कोषागार को ऑनलाईन प्रेषित करेगा और पेंशन-धारक को एसएमएस भेजेगा।